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Thread: Dadi-Nani ki kahaniya.

  1. #1
    SB MahaGuru Lieutenant-Colonel imperium's Avatar
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    Default Dadi-Nani ki kahaniya.

    Hum sabhi logon ne apne bachpan mein (aur main toh abhi bhi) apne dadi aur nani se kahani sunte hue badhe hue hain....



    Par aaj-kal ke bacche is cheeze ka anubhav bahut kam kar pate hain. Goan ki mitti ki mehek,kheton mein ghumna, yeh sab unko majak aur pc playstation mobile par khelna hi zindagi lagti hai..


    Let all of us write our stories jo humne bachpan mein suni thi. Share your stories and let us try to tell stories to our small brothers/sisters, your children or your grandchildren...

    Because any school, activity, hostel, won't teach them humanity....


  2. #2
    SB MahaGuru Lieutenant-Colonel imperium's Avatar
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    One of my ever fav.


    A man went to the court of Raja Bhoj with a complaint against a saint visiting his locality..

    The man said,"Maharaj the saint visiting our locality is a fake and he humiliated me...".

    Calmly Raja Bhoj asked for the problem... the man started off again..,"Maharaj, I just went to ask him two questions and he threw soil lumps on me.."

    In Maharaja's Darbar Kavi Kalidas was also present he asked the man about the questions.

    The man said,"I asked him two questions...
    1. If god exsist, then why can't we see him..?
    2.If everything is god's wish then why to work..?".

    Kalidas smilingly answered the man.." If the saint threw stone at you,you must have had pain. Please so us the pain in order to get the man punished."
    The man said.."Pain can only be felt and not seen"
    Kalidas instantly said,"God can also only be felt and not seen he always stays in everyone's mind . As per the second question if everything is god's will then why did you came here for a complaint against the saint..??"
    The man got his queries cleared. And went away happily.....

    Last edited by imperium; 29-04-2011 at 11:11 AM.

  3. #3
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    wow.... awesome thread... i love it.............
    Live amongst people in such a manner that if you die they weep over you and if you are alive they crave for your company.

  4. #4
    Mr. Imperfect! Field Marshal sheikh's Avatar
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    Keep It Dude


    But One Thing Want To Tell You Please Give Font In Normal Size Because Every One Has Eyes And They Can Read It Well.

    I Hope You Edit It.

    Best Of Luck!




    Wherever You Are I'll Find You..Cause You're The One I Turn To
    Wherever You Be I'll Be With You..Cause You're The One My Heart Is Yo..I need you..

  5. #5
    SB MahaGuru Lieutenant-Colonel imperium's Avatar
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    Quote Originally Posted by sheikh9905677786 View Post
    Keep It Dude


    But One Thing Want To Tell You Please Give Font In Normal Size Because Every One Has Eyes And They Can Read It Well.

    I Hope You Edit It.

    Best Of Luck!





    Done...


    Please you all also post some stories.....

  6. #6
    SB MahaGuru Lieutenant-Colonel imperium's Avatar
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    Quote Originally Posted by sens View Post
    wow.... awesome thread... i love it.............

    Thanks a lot...
    Last edited by imperium; 29-04-2011 at 11:16 AM.

  7. #7
    teekhi jammu chilli Major General arumita's Avatar
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    nice thread














  8. #8
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    Quote Originally Posted by imperium View Post
    Done...


    Please you all also post some stories.....



    Firstly Say TO YOU Thanks For That. And I Will Try For Your Desire Things
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  9. #9
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    nyc,

    will re collect and will try 2 post.....
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  10. #10
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    एक राज्य का राजा बेहद कठोर और जिद्दी था। वह एक बार जो निर्णय ले लेता था, उसे बदलने को तैयार नहीं होता था। एक बार उसने प्रजा पर भारी कर लगाने की योजना मंत्रिमंडल के सामने रखी। मंत्रियों को यह प्रस्ताव अन्यायपूर्ण लगा। उसने इससे अपनी असहमति जताई। राजा क्रोधित हो उठा। उसने मंत्रिपरिषद को समाप्त करने का फैसला किया। यही नहीं, उसने सारे मंत्रियों के देश निकाले का आदेश दे दिया। मंत्री घबराए। वे समझ नहीं पा रहे थे कि इस स्थिति का सामना कैसे किया जाए।

    तभी उन्हें विक्रम नाई की याद आई। वह राजा का प्रिय था। उसने पहले भी कई मौकों पर राजा का क्रोध शांत किया था। उसे बुलाया गया। मंत्रियों ने उसे सारी स्थिति समझाई और प्रार्थना की कि वह ऐसा कुछ करे जिससे राजा को सद्बुद्धि आए। विक्रम ने यह चुनौती स्वीकार कर ली। वह राजा के पास उनके नाखून काटने गया। राजा ने अपनी अंगुलियां आगे कर दीं।

    विक्रम ने नखों पर गुलाब जल छिड़का और धीरे-धीरे नख काटने लगा। फिर उसने कहा, ‘महाराज, शरीर में इन नखों की आवश्यकता ही क्या है। वे बढ़ते रहते हैं और उन्हें बार-बार काटना पड़ता है। इनमें रोगों के कीटाणु भी रहते हैं। क्यों न इन्हें जड़ से उखाड़ कर फेंक दिया जाए?’

    राजा ने मुस्कराते हुए कहा, ‘वो तो है, लेकिन इन्हें उखाड़कर मत फेंक देना। ये तो हाथ-पैरों की शोभा हैं। भले ही इनका अधिक उपयोग न हो, पर ये आभूषण तुल्य हैं।’ इस पर विक्रम ने कहा, ‘महाराज रोगों का घर होते हुए भी ये हाथ-पैरों की शोभा हैं। ठीक उसी तरह मंत्रिपरिषद राज्य की शोभा है। मंत्री भले ही आपके किसी कार्य का विरोध करें, पर आपकी शोभा उन्हीं से है।’

    यह सुनते ही राजा की भृकुटी तन गई। विक्रम ने विनम्रतापूर्वक कहा, ‘राज्य की सेवा में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उनके बगैर राज्य बिना नखों के हाथ की तरह हो जाएगा।’ राजा समझ गया। उसने अपना आदेश वापस लेकर मंत्रियों को फिर से उनका दायित्व सौंप दिया।




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  11. #11
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    यह घटना उस समय की है, जब क्रांतिकारी रोशन सिंह को काकोरी कांड में मृत्युदंड दिया गया। उनके शहीद होते ही उनके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में एक जवान बेटी थी और उसके लिए वर की तलाश चल रही थी। बड़ी मुश्किल से एक जगह बात पक्की हो गई। कन्या का रिश्ता तय होते देखकर वहां के दरोगा ने लड़के वालों को धमकाया और कहा कि क्रांतिकारी की कन्या से विवाह करना राजद्रोह समझा जाएगा और इसके लिए सजा भी हो सकती है।

    किंतु वर पक्ष वाले दरोगा की धमकियों से नहीं डरे और बोले, ‘यह तो हमारा सौभाग्य होगा कि ऐसी कन्या के कदम हमारे घर पड़ेंगे, जिसके पिता ने अपना शीश भारत माता के चरणों पर रख दिया।’ वर पक्ष का दृढ़ इरादा देखकर दरोगा वहां से चला आया पर किसी भी तरह इस रिश्ते को तोड़ने के प्रयास करने लगा।

    जब एक पत्रिका के संपादक को यह पता लगा तो वह आगबबूला हो गए और तुरंत उस दरोगा के पास पहुंचकर बोले, ‘मनुष्य होकर जो मनुष्यता ही न जाने वह भला क्या मनुष्य? तुम जैसे लोग बुरे कर्म कर अपना जीवन सफल मानते हैं किंतु यह नहीं सोचते कि तुमने इन कर्मों से अपने आगे के लिए इतने कांटे बो दिए हैं जिन्हें अभी से उखाड़ना भी शुरू करो तो अपने अंत तक न उखाड़ पाओ। अगर किसी को कुछ दे नहीं सकते तो उससे छीनने का प्रयास भी न करो।’ संपादक की खरी-खोटी बातों ने दरोगा की आंखें खोल दीं और उसने न सिर्फ कन्या की मां से माफी मांगी, अपितु विवाह का सारा खर्च भी खुद वहन करने को तैयार हो गया।

    विवाह की तैयारियां होने लगीं। कन्यादान के समय जब वधू के पिता का सवाल उठा तो वह संपादक उठे और बोले, ‘रोशन सिंह के न होने पर मैं कन्या का पिता हूं। कन्यादान मैं करूंगा।’ वह संपादक थे- महान स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी।



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  12. #12
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    बात तब की है जब अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल पकड़ लिए गए। उन्हें कोतवाली लाया गया। कोतवाली में निगरानी रखने वाला सिपाही सो रहा था। बिस्मिल के पास भागने का पूरा मौका था। उन्होंने देखा कि वहां केवल बुजुर्ग मुंशीजी जागे हुए हैं। बूढ़े मुंशी ने भांप लिया कि बिस्मिल भागने की सोच रहे हैं। वह तुरंत बिस्मिल के पैरों पर गिर गए और बोले, ‘ऐसा न करना। नहीं तो मैं बंदी बना लिया जाऊंगा और मेरे बच्चे भूखों मर जाएंगे।’

    बिस्मिल को उन पर दया आ गई और उन्होंने भागने का विचार तत्काल त्याग दिया। संयोगवश दो दिनों के बाद ही ऐसा मौका उन्हें फिर मिला। उन्हें जब शौचालय ले जाया गया तो उनके साथ दो सिपाही थे। एक ने दूसरे से कहा कि इनके हाथों में बंधी रस्सियां हटा दो। मुझे विश्वास है कि ये भागेंगे नहीं। इसके बाद जब बिस्मिल शौचालय गए तो पाया कि शौचालय की दीवार ज्यादा ऊंची नहीं है। बस हाथ बढ़ाते ही वह दीवार के ऊपर हो जाते और क्षण भर में बाहर निकल जाते।

    उन्होंने देखा कि बाहर सिपाही कुश्ती देखने में मगन हैं। वह भागने ही वाले थे कि उन्हें विचार आया कि जिस सिपाही ने विश्वास कर इतनी स्वतंत्रता दी उससे विश्वासघात कैसे करूं। उन्होंने भागने का विचार तुरंत त्याग दिया। उन्होंने अपनी आत्मकथा में जेलर पंडित चंपालाल की भी काफी बड़ाई की है। उन्हें भागने के कई मौके हासिल हुए लेकिन उन्होंने सोचा कि इससे पंडित चंपालाल के ऊपर आफत आ जाएगी। बिस्मिल के लिए विश्वास की रक्षा सबसे बड़ी चीज थी।
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  13. #13
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    GREAT THREAD IMPERIUM... THANKS FOR SHARING...KEEP UPDATING..


  14. #14
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    Thanks for updates sheikh saab


    Last edited by imperium; 29-04-2011 at 10:50 PM.

  15. #15
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    एक बार कुदरत के सातों रंगों के बीच बहस छिड़ गई। प्रत्येक रंग यह साबित करने में लगा था कि वही सब से श्रेष्ठ है। सबसे पहले हरे रंग ने कहा कि वह जीवन और हरियाली का प्रतीक है, इसलिए ईश्वर ने उसका चयन खास तौर पर पत्तों के रंग के लिए किया है।


    धरती का एक बड़ा भाग हरियाली से ढका हुआ है। नीले रंग ने उसकी बात काटते हुए कहा, ‘आकाश व समुद का रंग नीला है। जल ही जीवन है। नीला जल नीले आकाश के बादलों से होकर नीले समुद्र में समा जाता है। बिना इस चक्र के विकास संभव नहीं, इसलिए मैं तुम सबसे श्रेष्ठ हूं।’


    तब पीला रंग बोला, ‘पीला खुशहाली का प्रतीक है। सूरज पीला है। पीली सूरजमुखी सारी दुनिया में हंसी व खुशी देती है। इसलिए मैं ही सर्वश्रेष्ठ स्थान का अधिकारी हूं।’ तभी नारंगी रंग ने कहा, ‘मैं मिठास और स्वास्थ्य का प्रतीक हूं। सभी मीठे व लाभकारी फलों पपीता, गाजर, आम व संतरा की छटा नारंगी है।’ तभी जामुनी रंग ने कहा, ‘श्रेष्ठ तो मैं हूं क्योंकि मैं पानी की गहराई व मन की शांति का प्रतीक हूं।’


    वर्षा ऋतु रंगों की इस सारी बहस को ध्यान से सुन रही थी। वह पास आकर बोली, ‘तुम सभी श्रेष्ठ हो। सभी को ईश्वर ने किसी न किसी खास कारण से बनाया है। लेकिन सर्वश्रेष्ठ है तुम सबका एक साथ होना। रंगों को यह उपदेश जैसी बात अच्छी नहीं लगी, वे तो सिर्फ अपनी तारीफ सुनना चाहते थे। तभी आकाश में जोर से बिजली कड़की। सभी रंगों ने डर कर एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिया और आकाश में बड़ा-सा इंद्रधनुष दिखाई देने लगा। रंगों ने देखा, सभी उनकी छटा निहार रहे थे। वर्षा ऋतु ने हंस कर समझाया, ‘तुम सबके अलग-अलग प्रशंसक हैं, लेकिन तुम्हारा एक साथ होना संपूर्ण जगत के लिए सुंदरता और जीवन का संदेश है।’ इसके बाद रंगों ने कभी एक-दूसरे से झगड़ा नहीं किया।






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