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Thread: Har Har Mahadev

  1. #166
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  2. #167
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    हे महाकाल दुष्टो का नाश करो !!!



    जय महाकाल !!!





  3. #168
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    शिव के बारे मे,
    जितना अधिक पता चलता जाता है ...
    उससे अधिक उत्सुकता बढ़ी जा रही है ..
    ऐसा लगता है ..जैसे किसी अनंत रहस्य की यात्रा पर
    बस चलते ही जा रहे है ...चलते ही जा रहे है ...

    नमः शिवाय



  4. #169
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  5. #170
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    ॐ त्रयंबकम यजामहे सुगंधिँपुष्टि वर्धनम
    उर्वारुकमिव बंधनात मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।

    जय जय जय महाकाल
    हर हर महादेव

  6. #171
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  7. #172
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    .


    ॐ नमो भगवते रुद्राए ...
    "ॐ हौं जूं स:, ॐ भूर्भुव स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम
    उर्वारुक मिव बन्धनान, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात स्व: भुव भू ॐ, स: जूँ हौं ॐ "
    !!शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..!!
    !!शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..!!
    !!शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..शिव ॐ..!! JAI HO HAMARE BHOLE BABA KI

  8. #173
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    *******शिवाष्टकम स्तोत्र*******
    पशुपतिं द्युपतीं धरणीपतिं भुजगलोकपतिं च सतीपतिम !
    प्रणतभक्तजनार्तिहरं परं भजत रे मनुजा गिरिजापतिम !!१!!
    न जनको जननी न च सोदारो न तनयो न च भूरिबलं कुलम!
    अवति कोsपि न कालवशं गतं भजत रे मनुजा गिरिजापतिम!!२!!
    मुरजडिंडीमवाद्यविलक्षणं मधुर पंचम नाद विशारदम !
    प्रथमभूतगनैरपि सेवितं भजत रे मनुजा गिरिजापतिम !!३!!
    शरणदं सुखदं शरणान्वितं शिव शिवेति शिवेति नतं नृणाम!
    अभयदंकरुणावरुणालयं भजत रे मनुजा गिरिजापतिम !!४!!
    नरशिरोरचितं मणिकुण्डलं भूजगहारमुदं वृषभध्वजम !
    चितिर जोधबलीकृतविग्रहं भजत रे मनुजा गिरिजापतिम !!५!!
    मखविनाशकरं शशिशेखरं सततमध्वरभाजि फलप्रदम !
    प्रलयदग्धसुरासुरमानवं भजत रे मनुजा गिरिजापतिम !!६!!
    मदमपास्य चिरं हृदि संस्थितं मरणजन्मज़राभयपीडितम!
    जगदुदीक्ष्य समीपभयाकुलं भजत रे मनुजा गिरिपतिम !!७!!
    हरिविरविरंचीसुराधिपपूजितं यमजनेशधनेशनमस्कृतम !
    त्रियननं भुवनत्रितयाधियां भजत रे मनुजा गिरिजापतिम !!८!!
    पशुपतेरिमष्टकमकमद्भुतं विरचितं पृथिवी पति सूरिणा !
    पठेति संऋणुते मनुज: सदा शिवपुरीं वसते लभते मुदाम!!९!!
    अरे मनुष्यो! जो समस्त प्राणियों, स्वर्ग, पृथ्वी और नाग लोक के पति हैं, दक्ष कन्या सटी के स्वामी हैं, शरणागत प्राणियों और भक्तजनों की पीड़ा दूर करनेवाले हैं, उन परमपुरुष पार्वती-वल्लभ शंकर जि को भजो!!१!!
    ऐ मनुष्यो! कालके वशमें पड़े हुए जीव को पिता, माता, भाई, बेटा, अत्यंत बल और कुलइन में से कोई भी नहीं बचा सकता, इसलिये तुम गिरिजापति को भजो!!२!!
    रे मनुष्यो! जो मृदंग और डमरू बजाने में निपुण हैं, मधुर पंचम स्वर के गाने में कुशल हैं, प्रमथ और भूतगण जिनकी सेवा में रहते हैं, उन गिरिजापति को भजो!!३!!
    हे मनुष्यो! शिव! शिव! शिव! कहकर मनुष्य जिनको प्रणाम करता है, जो शरणागतों को शरण, सुख और अभय देनेवाले हैं, उन दयासागर गिरिजापति का भजन करो!!४!!
    अरे मनुष्यो! जो नरमुण्डरुपी मणियों का कुण्डल और साँपों का हार पहनते हैं, जिनका शरीर चिता की धूलिसे धूसर है, उस वृषभध्वज गिरिजापति को भजो!!५!!
    रे मनुष्यो! जिन्होंने दक्ष-यज्ञ का विध्वंस किया था; जिनके मस्तक पर चन्द्रमा सुशोभित है, जो यज्ञ करनेवालों को सदा ही फल देनेवाले हैं, उन गिरिजापति को भजो!!६!!
    अरे मौश्यो! जगत को जन्म, ज़रा और मरण के भय से पीड़ित, सामने उपस्थित भय से व्याकुल देखकर बहुत दिनों से हृदय में संचित मद का त्याग कर उन गोइरिजापति को भजो!!७!!
    रे मनुष्यो! विष्णु, ब्रह्मा और इंद्र जिनकी पूजा करते हैं; यम और कुबेर जिनको प्रणाम करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं तथा जो त्रिभुवन के स्वामी हैं, उन गिरिजापति को भजो!!८!!
    जो मनुष्य पृथ्वीपति सूरि के बनाए हुए अद्भुत पशुपति -अष्टक का सदा ही पथ आर श्रवन करता है, वह शिवपुरी में निवास करता और आनंदित होता है!

    !!सत्यम शिवम् सुन्दरम===सत्यं सत्यं न संशय !!

    ॐ नमःशिवाय

  9. #174
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  10. #175
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    अहमदनगर की पहाडी पर किले के पीछे हरीशचन्*द्र की कंदराओं मे स्थित ये अद्भुत शिवलिंग केदारेश्*वर के नाम से प्रसिद्ध है, ये अपने आधार से आश्*चर्यजनक रूप से पॉच फीट तक पानी से घिरा रहता है, वर्षाकाल में तो इस कन्दरा मे पहुचॅना बहुत ही कठिन है अन्*य समय में भी अत्यंत शीतल जलधारा के साथ-साथ ही यहॉ पहुचा जाता है । किवदन्*ती है कि इस अद्भुत शिवलिंग के छत्र का चौथा पाया जिस दिन गिर जायेगा उसी दिन पृथ्वी पर प्रलय आ जाएगी।
    Last edited by rajpaldular; 14-12-2012 at 01:36 PM.

  11. #176
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    श्री महाकाल को नमस्कार

    नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शन्कराय च मयस्करय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।
    ईशानः सर्वविध्यानामीश *्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपति र्ब्रम्हणोधपति र्ब्रम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।
    तत्पुरषाय विद्म्हे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।।

  12. #177
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    भगवान शिव के १०८ नाम

    शिव - कल्याण स्वरूप
    महेश्वर - माया के अधीश्वर
    शम्भू - आनंद स्स्वरूप वाले
    पिनाकी - पिनाक धनुष धारण करने वाले
    शशिशेखर - सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले
    वामदेव - अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
    विरूपाक्ष - भौंडी आँख वाले
    कपर्दी - जटाजूट धारण करने वाले
    नीललोहित - नीले और लाल रंग वाले
    शंकर - सबका कल्याण करने वाले
    शूलपाणी - हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
    खटवांगी - खटिया का एक पाया रखने वाले
    विष्णुवल्लभ - भगवान विष्णु के अतिप्रेमी
    शिपिविष्ट - सितुहा में प्रवेश करने वाले
    अंबिकानाथ - भगवति के पति
    श्रीकण्ठ - सुंदर कण्ठ वाले
    भक्तवत्सल - भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले
    भव - संसार के रूप में प्रकट होने वाले
    शर्व - कष्टों को नष्ट करने वाले
    त्रिलोकेश - तीनों लोकों के स्वामी
    शितिकण्ठ - सफेद कण्ठ वाले
    शिवाप्रिय - पार्वती के प्रिय
    उग्र - अत्यंत उग्र रूप वाले
    कपाली - कपाल धारण करने वाले
    कामारी - कामदेव के शत्रु
    अंधकारसुरसूदन - अंधक दैत्य को मारने वाले
    गंगाधर - गंगा जी को धारण करने वाले
    ललाटाक्ष - ललाट में आँख वाले
    कालकाल - काल के भी काल
    कृपानिधि - करूणा की खान
    भीम - भयंकर रूप वाले
    परशुहस्त - हाथ में फरसा धारण करने वाले
    मृगपाणी - हाथ में हिरण धारण करने वाले
    जटाधर - जटा रखने वाले
    कैलाशवासी - कैलाश के निवासी
    कवची - कवच धारण करने वाले
    कठोर - अत्यन्त मजबूत देह वाले
    त्रिपुरांतक - त्रिपुरासुर को मारने वाले
    वृषांक - बैल के चिह्न वाली झंडा वाले
    वृषभारूढ़ - बैल की सवारी वाले
    भस्मोद्धूलितविग्रह - सारे शरीर में भस्म लगाने वाले
    सामप्रिय - सामगान से प्रेम करने वाले
    स्वरमयी - सातों स्वरों में निवास करने वाले
    त्रयीमूर्ति - वेदरूपी विग्रह करने वाले
    अनीश्वर - जिसका और कोई मालिक नहीं है
    सर्वज्ञ - सब कुछ जानने वाले
    परमात्मा - सबका अपना आपा
    सोमसूर्याग्निलोचन - चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आँख वाले
    हवि - आहूति रूपी द्रव्य वाले
    यज्ञमय - यज्ञस्वरूप वाले
    सोम - उमा के सहित रूप वाले
    पंचवक्त्र - पांच मुख वाले
    सदाशिव - नित्य कल्याण रूप वाले
    विश्वेश्वर - सारे विश्व के ईश्वर
    वीरभद्र - बहादुर होते हुए भी शांत रूप वाले
    गणनाथ - गणों के स्वामी
    प्रजापति - प्रजाओं का पालन करने वाले
    हिरण्यरेता - स्वर्ण तेज वाले
    दुर्धुर्ष - किसी से नहीं दबने वाले
    गिरीश - पहाड़ों के मालिक
    गिरिश - कैलाश पर्वत पर सोने वाले
    अनघ - पापरहित
    भुजंगभूषण - साँप के आभूषण वाले
    भर्ग - पापों को भूंज देने वाले
    गिरिधन्वा - मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले
    गिरिप्रिय - पर्वत प्रेमी
    कृत्तिवासा - गजचर्म पहनने वाले
    पुराराति - पुरों का नाश करने वाले
    भगवान् - सर्वसमर्थ षड्ऐश्वर्य संपन्न
    प्रमथाधिप - प्रमथगणों के अधिपति
    मृत्युंजय - मृत्यु को जीतने वाले
    सूक्ष्मतनु - सूक्ष्म शरीर वाले
    जगद्व्यापी - जगत् में व्याप्त होकर रहने वाले
    जगद्गुरू - जगत् के गुरू
    व्योमकेश - आकाश रूपी बाल वाले
    महासेनजनक - कार्तिकेय के पिता
    चारुविक्रम - सुन्दर पराक्रम वाले
    रूद्र - भक्तों के दुख देखकर रोने वाले
    भूतपति - भूतप्रेत या पंचभूतों के स्वामी
    स्थाणु - स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले
    अहिर्बुध्न्य - कुण्डलिनी को धारण करने वाले
    दिगम्बर - नग्न, आकाशरूपी वस्त्र वाले
    अष्टमूर्ति - आठ रूप वाले
    अनेकात्मा - अनेक रूप धारण करने वाले
    सात्त्विक - सत्व गुण वाले
    शुद्धविग्रह - शुद्धमूर्ति वाले
    शाश्वत - नित्य रहने वाले
    खण्डपरशु - टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
    अज - जन्म रहित
    पाशविमोचन - बंधन से छुड़ाने वाले
    मृड - सुखस्वरूप वाले
    पशुपति - पशुओं के मालिक
    देव - स्वयं प्रकाश रूप
    महादेव - देवों के भी देव
    अव्यय - खर्च होने पर भी न घटने वाले
    हरि - विष्णुस्वरूप
    पूषदन्तभित् - पूषा के दांत उखाड़ने वाले
    अव्यग्र - कभी भी व्यथित न होने वाले
    दक्षाध्वरहर - दक्ष के यज्ञ को नष्ट करने वाले
    हर - पापों व तापों को हरने वाले
    भगनेत्रभिद् - भग देवता की आंख फोड़ने वाले
    अव्यक्त - इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले
    सहस्राक्ष - अनंत आँख वाले
    सहस्रपाद - अनंत पैर वाले
    अपवर्गप्रद - कैवल्य मोक्ष देने वाले
    अनंत - देशकालवस्तुरूपी परिछेद से रहित
    तारक - सबको तारने वाला
    परमेश्वर - सबसे परे ईश्वर

  13. #178
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  14. #179
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  15. #180
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