हर हर महादेव ...............हर हर गंगे
हर हर महादेव ...............हर हर गंगे
♥♥ ऊँ नम: शिवाय ♥ ऊँ नम: शिवाय ♥ऊँ नम: शिवाय ♥ऊँ नम: शिवाय ♥♥
शिव लिंग कि अद्धी परिकर्मा क्यूँ करते हैं? / ध्यान रखें शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा न करें!
शिवजी एक मात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें लिंग रूप में पूजा जाता है।शिव ही वे देवता हैं जिन्होंने कभी कोई अवतार नहीं लिया। शिव कालों के काल है यानी साक्षात महाकाल हैं। वे जीवन और मृत्यु के चक्र से परे हैं इसीलिए समस्त देवताओं में एकमात्र वे परब्रम्ह है इसलिए केवल वे ही निराकार लिंग के रूप में पूजे जाते हैं। इस रूप में समस्त ब्रम्हाण्ड का पूजन हो जाता है क्योंकि वे ही समस्त जगत के मूल कारण है।
शिव का पूजन लिगं रूप में ही ज्यादा फलदायक माना गया है। शिव का मूर्तिपूजन भी श्रेष्ठ है किंतु लिंग पूजन सर्वश्रेष्ठ है।शिव पिंडी की परिक्रमा में जलहरी या जलाधारी (अरघा का आगे निकला भाग) की दूसरी छोर तक जाकर, उसे लांघे बिना मुड़े व विपरीत दिशामें चलकर परिक्रमा पूर्ण करें। शास्त्रों के अनुसार इस तरह ही शिवलिंग की परिक्रमा करना चाहिए। शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग जब प्रकट हुआ था तो वह अग्रि के रूप में था।
पृथ्वी पर शिवलिंग किस तरह स्थापित हो यह एक समस्या थी।
इसीलिए तब सारे देवताओं ने मिलकर प्रार्थना कि तो पार्वती जी ने अपने तप के प्रभाव से जलाधारी प्रकट की। इसका आकार स्त्री की योनी के समान है। इसीलिए माना जाता है कि शिवलिंग को जलाधारी से अलग करने पर दोष लगता है। कहा जाता है कि पार्वती शक्ति का रूप है और जलाधारी से शक्ति प्रक्षेपित होती है; इसलिए सामान्य श्रद्धालु यदि उस जलाधारी को लांघे, तो उसे उस शक्तिसे कष्ट हो सकता है। अत: पिंडीकी अर्धपरिक्रमा ही करना चाहिए।
Thanks for the above info...
Shiv ka janam kab hua aur saare devta main sirf shiv ko he kyu mahadev kaha jaata hai...Any specific reason..
“Falsehood can buy you many supporters, truth has few friends.”
जड़-उपासना, शिव को छोड़कर शव की आराधना पाश्चात्त्य संस्कृति के विष-वृक्ष का फल है! आज तो समस्त संसार इस ज्वाला में झुलस रहा है और लोग इसे सुखका सुन्दर अमृत-निर्झर मान कर इसमें आकंठ डूबे हुए हैं!
जड़ सभ्यता ने आत्मा के स्थान पर शरीर की, परमात्मा के स्थान पर जगत की, आत्मकल्याण के स्थान पर सर्वनाश की और विश्वकल्याण के स्थान पर संहार की प्रतिष्ठा की है! सब अपनी ही ऐश्वर्यवृद्धि में व्यस्त हैं!
समस्त प्रकार के संयम-नियम हटाकर, सब तरह के बंधन और मर्यादा को तोड़कर विलासता, व्यसन, पापाचार, सुखसम्भोग में आत्मविस्मृत रहना, यही आधुनिक जड़ सभ्यता का फल है!
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thanks for liking.
jab Brahmand me kuchh bhee nahi tha, kewal shoonya tha, grah, star, galaxy kuchh bhee nahi tha,
kewal Shiv hee the.
Shiv ajar, amar, ajanma, avinashi hain.
Shiv se hee poore brahmaand kaa vikas hua.
Brahma aur Vinshnu aadi bhee Mahadev ke "Ansh Avtar" hain.
Mataa Aadi Shakti bhee Mahadev ka ardh roop hai, arthaat wo bhee Mahadev kaa aadha bhaag hain.
isiliye SHiv ko devon ke dev "Maha Dev" kahte hain.
Om Namah Shivaya
Life is about using the whole box of Crayons
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