कांग्रेस की डिवाइड एंड रूल पोलिसी:-
1. 2008 के महाराष्ट्र के चुनाव में राज ठाकरे को अपने मीडिया पॉवर से हीरो बनाया। कांग्रेस विरोधी वोट शिव सेना + बीजेपी vs मनस (MNS) में बँट गए। सरकार कांग्रेस की बनी। कांग्रेस ने डिवाइड और रूल अपनाया क्योंकि 2008 के मुंबई हमलों के पश्चात कांग्रेस की अपने बलबूते जीतने की सम्भावना बहुत ही नगण्य थी।
2. 2012 के गुजरात के चुनाव में केशु भाई पटेल को अपनी मीडिया पॉवर से हीरो बनाया। कांग्रेस विरोधी वोट बीजेपी और गुजरात विकास पार्टी के बीच बँट गए। कांग्रेस को 2 सीट अधिक मिली, बीजेपी को 2 सीटें कम और कांग्रेस को नेट लाभ हुआ किन्तु गुजरात की जनता समझदार थी, सरकार कांग्रेस की नहीं बन पाई। कांग्रेस ने डिवाइड और रूल अपनाया क्योंकि नरेन्द्र मोदी के विकास कार्यो के कारण गुजरात में कांग्रेस के जीतने की संभावना बहुत कम थी। कांग्रेस के पास काला धन बहुत है, केशुभाई पटेल को भी 450 करोड़ रुपये दिए गए थे, परन्तु गुजरात में कांग्रेस की दाल नहीं गली।
3. 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए अरविन्द केजरीवाल को अपनी मीडिया पॉवर से हीरो बनाया। कांग्रेस विरोधी वोट बँट रहे हैं "बीजेपी" और "आम आदमी पार्टी" के मध्य । कांग्रेस को बहुत अधिक लाभ होने की संभावना बताई जा रही है। अरविन्द केजरीवाल के सहयोग से 2014 में कांग्रेस की सरकार बंनने के बहुत अधिक संभावना है। कांग्रेस पुनः डिवाइड और रुल अपना रही है क्योंकि कांग्रेस पार्टी के घोटालों, महंगाई, अत्याचारों इत्यादि के कारण कांग्रेस के जीतने की सम्भावना बहुत कम दिख रही है।
कांग्रेसी मीडिया के दिखावे पर मत जाओ, अपनी अकल लगाओ!


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adieu
se kamjor hai.
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