Page 265 of 453 FirstFirst ... 165215255263264265266267275315365 ... LastLast
Results 3,961 to 3,975 of 6785

Thread: √Hot Shot Summer Shouty√

  1. #3961
    💥💥💥💥💥💥 Lieutenant General hotspicyhot's Avatar
    Join Date
    Sep 2007
    Location
    MI6
    Posts
    47,130
    Rep Power
    100

    Default

    Yug yug se, karn karn me,
    srishti ke darpan me
    Vedo ki katha apar hai



    Life is 10% what happens to you and 90% how you react to it.

  2. #3962
    ___ Sa'aB™ ___ Field Marshal DesiCasanova's Avatar
    Join Date
    Aug 2009
    Posts
    368,506
    Rep Power
    100

    Default

    दोहा :
    * जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।
    नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल॥106॥
    भावार्थ:-उनके सिर पर जटाओं का मुकुट और गंगाजी (शोभायमान) थीं। कमल के समान बड़े-बड़े नेत्र थे। उनका नील कंठ था और वे सुंदरता के भंडार थे। उनके मस्तक पर द्वितीया का चन्द्रमा शोभित था॥106॥
    ╰დ╮LasTHINDU╭დ╯

  3. #3963
    ___ Sa'aB™ ___ Field Marshal DesiCasanova's Avatar
    Join Date
    Aug 2009
    Posts
    368,506
    Rep Power
    100

    Default

    चौपाई :
    * बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें॥
    पारबती भल अवसरु जानी। गईं संभु पहिं मातु भवानी॥1॥
    भावार्थ:-कामदेव के शत्रु शिवजी वहाँ बैठे हुए ऐसे शोभित हो रहे थे, मानो शांतरस ही शरीर धारण किए बैठा हो। अच्छा मौका जानकर शिवपत्नी माता पार्वतीजी उनके पास गईं।
    * जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा॥
    बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई॥2॥
    भावार्थ:-अपनी प्यारी पत्नी जानकार शिवजी ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया और अपनी बायीं ओर बैठने के लिए आसन दिया। पार्वतीजी प्रसन्न होकर शिवजी के पास बैठ गईं। उन्हें पिछले जन्म की कथा स्मरण हो आई॥2॥
    *पति हियँ हेतु अधिक अनुमानी। बिहसि उमा बोलीं प्रिय बानी॥
    कथा जो सकल लोक हितकारी। सोइ पूछन चह सैल कुमारी॥3॥
    भावार्थ:-स्वामी के हृदय में (अपने ऊपर पहले की अपेक्षा) अधिक प्रेम समझकर पार्वतीजी हँसकर प्रिय वचन बोलीं। (याज्ञवल्क्यजी कहते हैं कि) जो कथा सब लोगों का हित करने वाली है, उसे ही पार्वतीजी पूछना चाहती हैं॥3॥
    *बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी॥
    चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा॥4॥
    भावार्थ:-(पार्वतीजी ने कहा-) हे संसार के स्वामी! हे मेरे नाथ! हे त्रिपुरासुर का वध करने वाले! आपकी महिमा तीनों लोकों में विख्यात है। चर, अचर, नाग, मनुष्य और देवता सभी आपके चरण कमलों की सेवा करते हैं॥4॥
    दोहा :
    * प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।
    जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम॥107॥
    भावार्थ:-हे प्रभो! आप समर्थ, सर्वज्ञ और कल्याणस्वरूप हैं। सब कलाओं और गुणों के निधान हैं और योग, ज्ञान तथा वैराग्य के भंडार हैं। आपका नाम शरणागतों के लिए कल्पवृक्ष है॥107॥
    चौपाई :
    * जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी॥
    तौ प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना॥1॥
    भावार्थ:-हे सुख की राशि ! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं और सचमुच मुझे अपनी दासी (या अपनी सच्ची दासी) जानते हैं, तो हे प्रभो! आप श्री रघुनाथजी की नाना प्रकार की कथा कहकर मेरा अज्ञान दूर कीजिए॥1॥
    * जासु भवनु सुरतरु तर होई। सहि कि दरिद्र जनित दुखु सोई॥
    ससिभूषन अस हृदयँ बिचारी। हरहु नाथ मम मति भ्रम भारी॥2॥
    भावार्थ:-जिसका घर कल्पवृक्ष के नीचे हो, वह भला दरिद्रता से उत्पन्न दुःख को क्यों सहेगा? हे शशिभूषण! हे नाथ! हृदय में ऐसा विचार कर मेरी बुद्धि के भारी भ्रम को दूर कीजिए॥2॥
    ╰დ╮LasTHINDU╭დ╯

  4. #3964
    ___ Sa'aB™ ___ Field Marshal DesiCasanova's Avatar
    Join Date
    Aug 2009
    Posts
    368,506
    Rep Power
    100

    Default

    चौपाई :
    * बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें॥
    पारबती भल अवसरु जानी। गईं संभु पहिं मातु भवानी॥1॥
    भावार्थ:-कामदेव के शत्रु शिवजी वहाँ बैठे हुए ऐसे शोभित हो रहे थे, मानो शांतरस ही शरीर धारण किए बैठा हो। अच्छा मौका जानकर शिवपत्नी माता पार्वतीजी उनके पास गईं।
    * जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा॥
    बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई॥2॥
    भावार्थ:-अपनी प्यारी पत्नी जानकार शिवजी ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया और अपनी बायीं ओर बैठने के लिए आसन दिया। पार्वतीजी प्रसन्न होकर शिवजी के पास बैठ गईं। उन्हें पिछले जन्म की कथा स्मरण हो आई॥2॥
    *पति हियँ हेतु अधिक अनुमानी। बिहसि उमा बोलीं प्रिय बानी॥
    कथा जो सकल लोक हितकारी। सोइ पूछन चह सैल कुमारी॥3॥
    भावार्थ:-स्वामी के हृदय में (अपने ऊपर पहले की अपेक्षा) अधिक प्रेम समझकर पार्वतीजी हँसकर प्रिय वचन बोलीं। (याज्ञवल्क्यजी कहते हैं कि) जो कथा सब लोगों का हित करने वाली है, उसे ही पार्वतीजी पूछना चाहती हैं॥3॥
    *बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी॥
    चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा॥4॥
    भावार्थ:-(पार्वतीजी ने कहा-) हे संसार के स्वामी! हे मेरे नाथ! हे त्रिपुरासुर का वध करने वाले! आपकी महिमा तीनों लोकों में विख्यात है। चर, अचर, नाग, मनुष्य और देवता सभी आपके चरण कमलों की सेवा करते हैं॥4॥
    दोहा :
    * प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।
    जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम॥107॥
    भावार्थ:-हे प्रभो! आप समर्थ, सर्वज्ञ और कल्याणस्वरूप हैं। सब कलाओं और गुणों के निधान हैं और योग, ज्ञान तथा वैराग्य के भंडार हैं। आपका नाम शरणागतों के लिए कल्पवृक्ष है॥107॥
    चौपाई :
    * जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी॥
    तौ प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना॥1॥
    भावार्थ:-हे सुख की राशि ! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं और सचमुच मुझे अपनी दासी (या अपनी सच्ची दासी) जानते हैं, तो हे प्रभो! आप श्री रघुनाथजी की नाना प्रकार की कथा कहकर मेरा अज्ञान दूर कीजिए॥1॥
    * जासु भवनु सुरतरु तर होई। सहि कि दरिद्र जनित दुखु सोई॥
    ससिभूषन अस हृदयँ बिचारी। हरहु नाथ मम मति भ्रम भारी॥2॥
    भावार्थ:-जिसका घर कल्पवृक्ष के नीचे हो, वह भला दरिद्रता से उत्पन्न दुःख को क्यों सहेगा? हे शशिभूषण! हे नाथ! हृदय में ऐसा विचार कर मेरी बुद्धि के भारी भ्रम को दूर कीजिए॥2॥
    ╰დ╮LasTHINDU╭დ╯

  5. #3965
    ___ Sa'aB™ ___ Field Marshal DesiCasanova's Avatar
    Join Date
    Aug 2009
    Posts
    368,506
    Rep Power
    100

    Default

    * प्रभु जे मुनि परमारथबादी। कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी॥
    सेस सारदा बेद पुराना। सकल करहिं रघुपति गुन गाना॥3॥
    भावार्थ:-हे प्रभो! जो परमार्थतत्व (ब्रह्म) के ज्ञाता और वक्ता मुनि हैं, वे श्री रामचन्द्रजी को अनादि ब्रह्म कहते हैं और शेष, सरस्वती, वेद और पुराण सभी श्री रघुनाथजी का गुण गाते हैं॥3॥
    * तुम्ह पुनि राम राम दिन राती। सादर जपहु अनँग आराती॥
    रामु सो अवध नृपति सुत सोई। की अज अगुन अलखगति कोई॥4॥
    भावार्थ:-और हे कामदेव के शत्रु! आप भी दिन-रात आदरपूर्वक राम-राम जपा करते हैं- ये राम वही अयोध्या के राजा के पुत्र हैं? या अजन्मे, निर्गुण और अगोचर कोई और राम हैं?॥4॥
    दोहा :
    * जौं नृप तनय त ब्रह्म किमि नारि बिरहँ मति भोरि।
    देखि चरित महिमा सुनत भ्रमति बुद्धि अति मोरि॥108॥
    भावार्थ:-यदि वे राजपुत्र हैं तो ब्रह्म कैसे? (और यदि ब्रह्म हैं तो) स्त्री के विरह में उनकी मति बावली कैसे हो गई? इधर उनके ऐसे चरित्र देखकर और उधर उनकी महिमा सुनकर मेरी बुद्धि अत्यन्त चकरा रही है॥108॥
    चौपाई :
    * जौं अनीह ब्यापक बिभु कोऊ। कहहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ॥
    अग्य जानि रिस उर जनि धरहू। जेहि बिधि मोह मिटै सोइ करहू॥1॥
    भावार्थ:-यदि इच्छारहित, व्यापक, समर्थ ब्रह्म कोई और हैं, तो हे नाथ! मुझे उसे समझाकर कहिए। मुझे नादान समझकर मन में क्रोध न लाइए। जिस तरह मेरा मोह दूर हो, वही कीजिए॥1॥
    * मैं बन दीखि राम प्रभुताई। अति भय बिकल न तुम्हहि सुनाई॥
    तदपि मलिन मन बोधु न आवा। सो फलु भली भाँति हम पावा॥2॥
    भावार्थ:-मैंने (पिछले जन्म में) वन में श्री रामचन्द्रजी की प्रभुता देखी थी, परन्तु अत्यन्त भयभीत होने के कारण मैंने वह बात आपको सुनाई नहीं। तो भी मेरे मलिन मन को बोध न हुआ। उसका फल भी मैंने अच्छी तरह पा लिया॥2॥
    * अजहूँ कछु संसउ मन मोरें। करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें॥
    प्रभु तब मोहि बहु भाँति प्रबोधा। नाथ सो समुझि करहु जनि क्रोधा॥3॥
    भावार्थ:-अब भी मेरे मन में कुछ संदेह है। आप कृपा कीजिए, मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूँ। हे प्रभो! आपने उस समय मुझे बहुत तरह से समझाया था (फिर भी मेरा संदेह नहीं गया), हे नाथ! यह सोचकर मुझ पर क्रोध न कीजिए॥3॥
    * तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं॥
    कहहु पुनीत राम गुन गाथा। भुजगराज भूषन सुरनाथा॥4॥
    भावार्थ:-मुझे अब पहले जैसा मोह नहीं है, अब तो मेरे मन में रामकथा सुनने की रुचि है। हे शेषनाग को अलंकार रूप में धारण करने वाले देवताओं के नाथ! आप श्री रामचन्द्रजी के गुणों की पवित्र कथा कहिए॥4॥
    ╰დ╮LasTHINDU╭დ╯

  6. #3966
    ___ Sa'aB™ ___ Field Marshal DesiCasanova's Avatar
    Join Date
    Aug 2009
    Posts
    368,506
    Rep Power
    100

    Default

    Good eves. ...
    ╰დ╮LasTHINDU╭დ╯

  7. #3967
    ___ Sa'aB™ ___ Field Marshal DesiCasanova's Avatar
    Join Date
    Aug 2009
    Posts
    368,506
    Rep Power
    100

    Default

    And a milestone 350k ......
    ╰დ╮LasTHINDU╭დ╯

  8. #3968
    SB Champion Captain rohan_j's Avatar
    Join Date
    Apr 2013
    Posts
    2,392
    Rep Power
    66

    Default

    Quote Originally Posted by DesiCasanova View Post
    And a milestone 350k ......
    Hey!! Congrats dude!!! I came specially for this occasion..............

  9. #3969
    SB Champion Captain rohan_j's Avatar
    Join Date
    Apr 2013
    Posts
    2,392
    Rep Power
    66

    Default

    Quote Originally Posted by DesiCasanova View Post
    And a milestone 350k ......
    It says that....... You must spread some Reputation around before giving it to DesiCasanova again.

  10. #3970
    💥💥💥💥💥💥 Lieutenant General hotspicyhot's Avatar
    Join Date
    Sep 2007
    Location
    MI6
    Posts
    47,130
    Rep Power
    100

    Default

    Quote Originally Posted by DesiCasanova View Post
    And a milestone 350k ......

    Hey!! Congrats dude!!! I came specially for this occasion..............
    Life is 10% what happens to you and 90% how you react to it.

  11. #3971
    💥💥💥💥💥💥 Lieutenant General hotspicyhot's Avatar
    Join Date
    Sep 2007
    Location
    MI6
    Posts
    47,130
    Rep Power
    100

    Default

    Quote Originally Posted by DesiCasanova View Post
    And a milestone 350k ......


    It says that....... You have given out too much Reputation in the last 24 hours, try again later..
    Life is 10% what happens to you and 90% how you react to it.

  12. #3972
    Greatest Ghonchu Lieutenant General crazy_fog's Avatar
    Join Date
    Aug 2006
    Location
    Nowhere
    Posts
    61,624
    Rep Power
    100

    Default


    Away from God, away from happiness.



  13. #3973
    ___ Sa'aB™ ___ Field Marshal DesiCasanova's Avatar
    Join Date
    Aug 2009
    Posts
    368,506
    Rep Power
    100

    Default

    Quote Originally Posted by rohan_j View Post
    Hey!! Congrats dude!!! I came specially for this occasion..............
    Quote Originally Posted by rohan_j View Post
    It says that....... You must spread some Reputation around before giving it to DesiCasanova again.
    Quote Originally Posted by hotspicyhot View Post
    Hey!! Congrats dude!!! I came specially for this occasion..............
    Quote Originally Posted by hotspicyhot View Post
    It says that....... You have given out too much Reputation in the last 24 hours, try again later..
    Thank you ......thank you!
    ╰დ╮LasTHINDU╭დ╯

  14. #3974
    ___ Sa'aB™ ___ Field Marshal DesiCasanova's Avatar
    Join Date
    Aug 2009
    Posts
    368,506
    Rep Power
    100

    Default

    Cupid and his little fleet of angels will be out and about to zing their arrows to the right person for you.
    ╰დ╮LasTHINDU╭დ╯

  15. #3975
    Dactar :) Lieutenant-Colonel Neha1's Avatar
    Join Date
    Apr 2013
    Location
    Dev bhumi Himachal
    Posts
    9,318
    Rep Power
    100

    Default

    Quote Originally Posted by crazy_fog View Post
    Happy navratri daddu ....
    Anything that costs you your peace is too expensive

Similar Threads

  1. √ √ >>>> H(*)(*)tTtiIiIieEE RAQUEL ALESSI <<<< √ √
    By ##rinku## in forum International Celebrities
    Replies: 7
    Last Post: 24-09-2008, 07:00 PM
  2. √√√ ∑πjoҸ Lif℮ √√√™
    By dilmir in forum General Discussion
    Replies: 26
    Last Post: 16-12-2006, 03:27 AM
  3. √√√ My Favourite Hollywood Actors √√√™
    By dilmir in forum International Celebrities
    Replies: 30
    Last Post: 12-12-2006, 08:17 AM

Bookmarks

Posting Permissions

  • You may not post new threads
  • You may not post replies
  • You may not post attachments
  • You may not edit your posts
  •